आयुर्वेदिक और हर्बल
श्रीलंका में आयुर्वेद चिकित्सा देश के सदियों पुराने स्वदेशी ज्ञान, प्राकृतिक वातावरण और सांस्कृतिक भंडार पर आधारित है। पुरातात्विक साक्ष्यों के अनुसार, मानव सभ्यता 30,000 साल पुरानी है। उस युग के गुफा मानवों ने कई जंगली पौधों को पालतू बनाया और उनका उपयोग भोजन और औषधियों के लिए किया।
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सिद्धलेपा नील्यादि तेल
सिद्धलेपा नील्यादि तेल
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Siddhalepa एक प्रसिद्ध ब्रांड है जो हेट्टीगोडा इंडस्ट्रीज द्वारा निर्मित है, जो श्रीलंका के प्रमुख स्वदेशी औषधियों और प्राकृतिक हर्ब्स से बने आयुर्वेदिक उपचारों के निर्माताओं में से एक है। नील्यादी तेल एक पारंपरिक आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन है, जो बालों और खोपड़ी की देखभाल में इसके चिकित्सीय उपयोगों के लिए प्रसिद्ध है। यह तेल आपके बालों और खोपड़ी को पुनर्जीवित करता है और बालों की वृद्धि पर अच्छा प्रभाव डालता है, बालों का सफेद होना कम करता है और बालों का रंग हल्का करता है।
यह तेल केवल बाहरी उपयोग के लिए है। उपयोग के निर्देशों में सिर को ढकने के लिए तेल की उचित मात्रा लगाना और 15 मिनट तक मालिश करना शामिल है, जब तक कि तेल पूरी तरह से खोपड़ी में प्रवेश न कर जाए। आप फिर इसे धो सकते हैं। यह तेल दृष्टि, नाक की समस्याओं जैसे बलगम, बहती नाक आदि के लिए भी लाभकारी है।
सामग्री:
- एंकेंडा (एक्रोनिचिया पेडुनकुलता)
- नील अवरिया (इंडिगोफेरा टिंक्टोरिया)
- लाल चंदन (टेरोकार्पस सैंटालिनस)
- नारियल तेल (कोकोस न्यूसिफेरा)
- मोनोकोरिया वेजिनेलिस (दीया हबराला)
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